कविता "बदला "
बदला हे भारत के वीर सपूतों उठो शस्त्र संधान करो, नीच पडोसी रचित बलि का अब तो कुछ तुम ध्यान करो,, उठो बुलाती माँ भारती बदला लो भ्राताओं का कूच करो उस और अभी आशीष सभी माताओं का। सूनी मांगों की सौगंध तुम्हे विजयी होकर ही है आना और लेश मात्रा भी संशय हो तो घर में ही दुबके रह जाना विश्वास रखो दृढ अपने मन में हर हाल लक्ष्य को है पाना रखो रक्त को ताप तक्त अंदर तक घुसते ही जाना सन्देश कहो हे पवन देव आते उनके यमदूत सक्ष उनकी गोली का एक लक्ष्य ,दुश्मन का केवल वक्ष वक्ष। हे नीच पडोसी शर्म नहीं घात लगा कर वध करते वीर नहीं तुम कायर हो जो खुद मरने से हो डरते। -मार्कण्डेय तिवारी (व्याकुल ) एयर वेटरन भारतीय वायु सेना 9754967919